रविवार, 20 नवंबर 2011

‘कोरी किताब

‘कोरी किताब

aजब ‘कोरी किताब ‘ की प्रति श्री चन्द्रकान्त देवताले जी के हाथों में पहुँची तो उन्होंने डा सोनाने को पत्र लिखकर  जताया कि उनके हाथों में आते आते कोरी किताब कविताओं से भर गई। किताब में भोपाल पर लिखा गीत बहुत लाजवाब हैः-.
          अय,शहरे भोपाल तुझको मेरा सलाम
            तेरी गलियों में बसा जन्नत का धाम..
भोपाल की गलियों में जन्नत बसा हुआ है। वास्तव में जो एक बार भोपाल आ जाता है ,वह भोपाल का ही होकर रह जाता है। हालाकि इस कविता संग्रह में गीत,ग़ज़ल,कविताएं आदि है। हृदय के किसी कोने में अवश्य ही यह किताब अपनी जगह बनाने की कोशिश में है।जल्द ही यह आरजू  भी पूरी हो जाएगी।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें