‘कोरी किताब
अय,शहरे भोपाल तुझको मेरा सलाम
तेरी गलियों में बसा जन्नत का धाम..
भोपाल की गलियों में जन्नत बसा हुआ है। वास्तव में जो एक बार भोपाल आ जाता है ,वह भोपाल का ही होकर रह जाता है। हालाकि इस कविता संग्रह में गीत,ग़ज़ल,कविताएं आदि है। हृदय के किसी कोने में अवश्य ही यह किताब अपनी जगह बनाने की कोशिश में है।जल्द ही यह आरजू भी पूरी हो जाएगी।
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