
‘निर्वासिता’ नारी केन्द्रित यह कविता संग्रह पठनीय है। नारी मुक्ति आन्दोलन लगातार चल रहा है। सन् 1980 के बाद से नारी विमर्श पर बहुत काम हो रहा है। यह विषद विषद है। इस सम्बन्ध में विस्तृत चर्चाएं लगातार चल रही है, चलती रहेगी। क्या वास्तव में नारी आजाद है यदि वह आजाद है तो अब तक वह आज़ाद क्यों नहीं हो पा रही है। जो आज़ादी नारियों को प्राप्त है उससे नारियों को लाभ कम किन्तु हानि अधिक हो रही है। आजादी के नाम पर या तो नारियों का शोषण हो रहा है या नारियाँ आजादी का अनुचित लाभ उठा रही है। जिन्हे वास्तव में आजादी की आवश्यकता है उन्हे आजादी नहीं मिल पा रही है। यदि देखा जाय तो नारी ही नारी की दुश्मन है।पुरूष अपनी ओर से कभी भी नारी को प्रताड़ित नहीं करता जब तक कि अन्य नारी पुरूष को नारी के विरूद्ध हथियार नहीं उठाती।नारियों ने अन्य नारी को प्रताड़ित करने के लिए पुरूष का सहारा लिया और पुरूषों पर नारियों की प्रताड़ना का आरोप लगाया जाता है। उदाहरण..सास बहु,देवरानी जेठानी,सौतेली माँए आदि।डा सोनाने ने ‘निर्वासिता’ में नारियों के चरित्र पर भी लिखा है सिक्के के दोनों पहलुओं को देखा है फिर लिखा है।
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